वट सावित्री पूजा में क्या क्या सामान लगता है-लिस्ट व आसान विधि

vat savitri puja Samagri

वट सावित्री पूजा की तैयारी कर रही सुहागिन महिलाओं के लिए सही पूजा सामग्री जानना बेहद जरूरी है। बिना सही सामान के पूजा अधूरी रह सकती है और आपकी मेहनत बर्बाद हो सकती है।

इस गाइड में हमने खासतौर पर उन महिलाओं के लिए जानकारी तैयार की है जो पहली बार वट सावित्री व्रत रख रही हैं या फिर पूजा की संपूर्ण सामग्री की लिस्ट चाहती हैं।

हम आपको बताएंगे कि वट सावित्री पूजा सामग्री में कौन सी चीजें जरूरी हैं, कोई भी सामान छूटने पर क्या करें, और सही पूजा विधि क्या है। साथ ही यह भी जानेंगे कि किन खास चीजों के बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती।

Table of Contents

वट सावित्री व्रत की संपूर्ण पूजन सामग्री की सूची

वट सावित्री पूजा
वट सावित्री पूजा

मूलभूत पूजा सामग्री

वट सावित्री व्रत की पूजा के लिए कुछ आधारभूत सामग्री की आवश्यकता होती है जो इस व्रत की पवित्रता को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। तांबे का लोटा इस पूजा का मुख्य आधार है, जिसमें पवित्र जल रखा जाता है। तांबे के बर्तन का उपयोग हिंदू धर्म में अत्यधिक शुभ माना जाता है क्योंकि यह जल की शुद्धता को बनाए रखता है।

गंगा जल का विशेष महत्व है क्योंकि यह पूजा में पवित्रता का प्रतीक है। यदि गंगा जल उपलब्ध न हो तो साफ पानी में तुलसी के पत्ते डालकर इसे पवित्र बनाया जा सकता है। सिंदूर सुहागिनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उनके पति की लंबी आयु का प्रतीक है। रोली का प्रयोग तिलक लगाने और पूजा में अर्पण करने के लिए किया जाता है।

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सजावट और धागे की सामग्री

वट सावित्री puja samagri में धागे और सजावट की सामग्री का विशेष स्थान है। कलावा पवित्र धागा है जो वट वृक्ष को बांधने के लिए उपयोग किया जाता है। यह लाल और पीले रंग का होता है और इसे पति की लंबी आयु के लिए बांधा जाता है।

कच्चा सूत विशेष रूप से इस व्रत के लिए आवश्यक है। इसे वट वृक्ष के चारों ओर सात बार लपेटा जाता है, जो सात जन्मों तक पति-पत्नी के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक है। मौली भी एक पवित्र धागा है जो पूजा के दौरान कलाई पर बांधा जाता है और वट वृक्ष को भी अर्पित किया जाता है।

दीप और सुगंध सामग्री

पूजा में दीप प्रज्वलन का अपना विशेष महत्व है। घी से जलने वाला दीपक सबसे शुद्ध और पवित्र माना जाता है। घी का दीपक अंधकार को दूर करने और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है।

दीपक चाहे मिट्टी का हो या पीतल का, इसे स्थिर स्थान पर रखना चाहिए। बाती कपास की सूती होनी चाहिए, जो घी को धीरे-धीरे जलाकर निरंतर प्रकाश प्रदान करे। अगरबत्ती वातावरण को सुगंधित और पवित्र बनाने के लिए आवश्यक है, जो देवी सावित्री को प्रसन्न करने में सहायक होती है।

फूल और प्रसाद सामग्री

फूल और प्रसाद की सामग्री इस व्रत को संपूर्ण बनाने के लिए अत्यावश्यक है। लाल और पीले फूल विशेष रूप से इस पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। ये रंग सौभाग्य और समृद्धि के प्रतीक हैं।

भीगे काले चने का प्रसाद इस व्रत की विशेषता है। इन्हें रात भर पानी में भिगोकर रखा जाता है और पूजा के समय वट वृक्ष को अर्पित किया जाता है। लीची मौसमी फल के रूप में चढ़ाई जाती है, जो मिठास और खुशी का प्रतीक है। मिठाई का भोग लगाना भी आवश्यक है, जो देवी सावित्री को प्रसन्न करने के लिए चढ़ाई जाती है।

विशेष आवश्यक सामग्री और उपकरण

पारंपरिक वस्तुएं – तिल, अक्षत, केले के पत्ते

वट सावित्री पूजा में कई पारंपरिक वस्तुओं का विशेष महत्व होता है जो इस व्रत की पवित्रता को बढ़ाती हैं। तिल इस पूजा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। तिल को पूजा में चढ़ाने से सुहाग की रक्षा होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।

अक्षत यानी साबुत चावल भी vat savitri puja samagri का अनिवार्य हिस्सा है। ये अक्षत देवी सावित्री को अर्पित किए जाते हैं और इन्हें वट वृक्ष पर भी चढ़ाया जाता है। अक्षत अक्षुण्णता का प्रतीक है और पति की दीर्घायु के लिए इनका उपयोग किया जाता है।

केले के पत्ते का प्रयोग पूजा में प्रसाद रखने और आसन के रूप में किया जाता है। केले के पत्ते प्राकृतिक रूप से पवित्र माने जाते हैं और इन पर रखा गया प्रसाद विशेष शुद्धता प्राप्त करता है।

उपयोगी उपकरण – बांस का पंखा, मिट्टी का घड़ा

पूजा की संपूर्णता के लिए कुछ विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। बांस का पंखा एक पारंपरिक उपकरण है जिसका उपयोग देवी सावित्री की पूजा में हवा करने के लिए किया जाता है। यह पंखा प्राकृतिक सामग्री से बना होता है और इसे शुभ माना जाता है।

मिट्टी का घड़ा पूजा में जल संचय के लिए उपयोग किया जाता है। इस घड़े में गंगाजल या स्वच्छ जल रखा जाता है, जिसका प्रयोग वट वृक्ष की पूजा और अभिषेक में किया जाता है। मिट्टी का घड़ा प्राकृतिक शुद्धता का प्रतीक है और इसमें रखा जल अधिक पवित्र माना जाता है।

नवविवाहिता महिलाओं के लिए विशेष सामग्री – वस्त्र से बने वर-वधू के जोड़े

नई बहुओं के लिए वट सावित्री व्रत में विशेष परंपराएं होती हैं। वस्त्र से बने वर-वधू के जोड़े इस व्रत की अनूठी विशेषता हैं। ये छोटे कपड़े के गुड़िया के जोड़े होते हैं जो नवविवाहिता महिलाएं बनाती हैं। इन जोड़ों को वट वृक्ष पर टांगा जाता है और देवी सावित्री से सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना की जाती है।

ये वस्त्र से बने जोड़े पति-पत्नी के प्रेम और एकता का प्रतीक हैं। नवविवाहिता महिलाएं इन्हें अपने हाथों से सिलती हैं, जो उनकी श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है।

पूजा के लिए नए वस्त्र

वट सावित्री व्रत में नए वस्त्र का विशेष महत्व है। पूजा करने वाली महिलाओं को स्वच्छ और नए कपड़े पहनने चाहिए। ये वस्त्र पवित्रता और शुभता के प्रतीक हैं। सामान्यतः लाल, पीले या गुलाबी रंग के वस्त्र इस अवसर पर पहने जाते हैं क्योंकि ये रंग सौभाग्य के सूचक माने जाते हैं।

नए वस्त्र पहनने से न केवल व्रती महिला की शोभा बढ़ती है बल्कि देवी सावित्री की कृपा भी प्राप्त होती है। ये वस्त्र व्रत की पूर्णता और श्रद्धा की अभिव्यक्ति का माध्यम हैं।

वट सावित्री व्रत की सही पूजा विधि

प्रातःकालीन तैयारी – स्नान, पीले या लाल वस्त्र धारण और सोलह श्रृंगार

वट सावित्री व्रत की शुरुआत प्रातःकाल उठकर संपूर्ण तैयारी से होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत आवश्यक है। ये रंग शुभता और मंगलकारी माने जाते हैं।

स्नान के पश्चात सोलह श्रृंगार भी करना चाहिए, जो सुहागिन स्त्रियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। इसमें बिंदी, काजल, चूड़ा, मंगलसूत्र आदि सभी सुहाग की निशानियां शामिल हैं।

व्रत का संकल्प लेने की विधि – सास-ससुर का आशीर्वाद

अब जब शारीरिक तैयारी पूर्ण हो जाती है, तो अगला चरण व्रत का संकल्प लेना है। इस महत्वपूर्ण चरण में सास और ससुर का आशीर्वाद लेने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। यह परंपरा पारिवारिक सामंजस्य और आशीर्वाद की निरंतरता बनाए रखती है।

वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा विधि – 7, 21 या 108 बार कच्चे सूत से लपेटना

संकल्प के पश्चात वट वृक्ष के समीप जाकर vat savitri puja samagri के साथ पूजा करनी चाहिए। इसमें सिंदूर, जल, अक्षत, तिल, फूल, फूल-माला आदि पूजन सामग्री अर्पित करें।

सबसे महत्वपूर्ण विधि है कच्चे सूत को वट वृक्ष पर 7, 21 या 108 बार लपेटते हुए परिक्रमा करना। यह संख्या आपकी श्रद्धा और समय के अनुसार निर्धारित कर सकते हैं। प्रत्येक परिक्रमा के दौरान मन में पति की दीर्घायु की कामना करनी चाहिए।

वट सावित्री व्रत कथा का पाठ और फल प्राप्ति

पूजा और परिक्रमा के बाद वट सावित्री व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। यह कथा सावित्री और सत्यवान की अमर प्रेम कहानी है जो इस व्रत की आधारशिला है।

इस व्रत कथा के पाठ से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है और पति के ऊपर आने वाले संकट दूर होते हैं। यह व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम और समर्पण को मजबूत बनाता है।

वट सावित्री व्रत की पूर्ण पूजन सामग्री और सही विधि की जानकारी प्राप्त करके आप इस पवित्र व्रत को संपूर्ण श्रद्धा के साथ कर सकते हैं। तांबे का लोटा, गंगा जल, सिंदूर, कच्चा सूत, फूल-माला और अन्य आवश्यक सामग्री के साथ जब आप वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए व्रत करती हैं, तो इससे आपके पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

इस व्रत की महानता सावित्री के पति सत्यवान को यमराज से वापस लाने की कथा में निहित है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर यह व्रत करने से सुहागिन महिलाओं के सौभाग्य में वृद्धि होती है और सभी संकट दूर होते हैं। अतः पूर्ण विधि-विधान और संपूर्ण सामग्री के साथ इस व्रत को करना अत्यंत शुभफलदायक है।

FAQs

1. वट सावित्री पूजा में कौन-कौन सी सामग्री लगती है?

वट सावित्री पूजा में तांबे का लोटा, गंगाजल, सिंदूर, रोली, कच्चा सूत, फूल, दीपक, अगरबत्ती, भीगे काले चने और मिठाई की आवश्यकता होती है।

2. वट सावित्री व्रत में कच्चा सूत क्यों बांधा जाता है?

कच्चा सूत वट वृक्ष के चारों ओर पति की लंबी आयु और सात जन्मों तक सुखी वैवाहिक जीवन के प्रतीक के रूप में बांधा जाता है।

3. वट सावित्री पूजा किस दिन की जाती है?

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को किया जाता है।

4. वट सावित्री पूजा में कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

वट वृक्ष की 7, 21 या 108 परिक्रमा श्रद्धा और परंपरा के अनुसार की जाती है।

5. वट सावित्री पूजा में कौन से फूल चढ़ाए जाते हैं?

लाल और पीले फूल जैसे गेंदे और गुलाब के फूल शुभ माने जाते हैं।

6. वट सावित्री व्रत का महत्व क्या है?

यह व्रत पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और सौभाग्य के लिए किया जाता है।

7. क्या वट सावित्री पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, यदि पास में वट वृक्ष उपलब्ध न हो तो घर में प्रतीकात्मक रूप से पूजा की जा सकती है।

8. वट सावित्री पूजा में कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?

भीगे काले चने, मिठाई, फल और लीची का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

9. वट सावित्री व्रत कथा क्यों पढ़ी जाती है?

सावित्री और सत्यवान की कथा वैवाहिक प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

10. वट सावित्री पूजा में कौन से वस्त्र पहनने चाहिए?

सुहागिन महिलाओं को लाल, पीले या गुलाबी रंग के नए वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

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