
वत सावित्री पूजा सामग्री की सूची बनाना हर साल की समस्या है! आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुहागिन महिलाएं अक्सर पूजा के दिन ही याद करती हैं कि कुछ जरूरी चीजें छूट गई हैं।
यह गाइड उन सभी व्रती महिलाओं के लिए है जो अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं। चाहे आप पहली बार यह व्रत कर रही हों या कई सालों से करती आ रही हों, यह लिस्ट आपके काम आएगी।
इस आर्टिकल में आप जानेंगी वट सावित्री पूजा की संपूर्ण सामग्री सूची जिसमें छोटी से छोटी चीज शामिल है। हम पूजा के लिए आवश्यक वस्त्र और श्रृंगार सामग्री के बारे में भी बताएंगे जो अक्सर भूल जाती है। साथ ही भोग और प्रसाद की तैयारी की पूरी जानकारी भी मिलेगी ताकि आपको कल सुबह दौड़भाग न करनी पड़े।
Table of Contents
वट सावित्री पूजा की संपूर्ण सामग्री सूची

मूर्ति और पूजा उपकरण
वत सावित्री पूजा सामग्री की शुरुआत करते समय सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है सत्यवान-सावित्री की कपड़े की बनी हुई मूर्ति। यह मूर्ति पूजा का केंद्रीय तत्व है और इसे व्रत की शुरुआत से पहले ही तैयार कर लेना चाहिए। कपड़े की मूर्ति बनाते समय सुनिश्चित करें कि यह साफ और नए कपड़े से बनी हो।
इसके साथ ही बांस का बना हुआ एक हाथ पंखा भी अत्यंत आवश्यक है। यह पंखा पूजा के दौरान विशेष महत्व रखता है और इसका उपयोग पूजा की परंपरागत विधि के अनुसार किया जाता है। बांस का पंखा प्राकृतिक सामग्री से बना होता है जो इस पूजा की पवित्रता को बढ़ाता है।
दीप और धूप सामग्री
पूजा के लिए मिट्टी का दीपक एक आवश्यक वस्तु है। मिट्टी के दीपक का प्रयोग करना शुभ माना जाता है क्योंकि यह पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इस दीपक में जलाने के लिए शुद्ध घी का उपयोग करना चाहिए। घी की ज्योति से निकलने वाला प्रकाश पूजा के माहौल को पवित्र बनाता है।
धूप और अगरबत्ती भी पूजा की आवश्यक सामग्री में शामिल हैं। ये सुगंधित पदार्थ पूजा के वातावरण को शुद्ध करते हैं और देवी-देवताओं को प्रसन्न करने में सहायक होते हैं। धूप जलाते समय सुनिश्चित करें कि यह अच्छी गुणवत्ता की हो।
👉 Buy करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

फूल, फल और प्राकृतिक सामग्री
पूजा में फूलों का विशेष स्थान है। ताजे और सुगंधित फूलों का चुनाव करें जो पूजा की पवित्रता को बढ़ाते हैं। मौसमी फलों का प्रयोग करना अत्यधिक शुभ माना जाता है।
खरबूजा इस पूजा में विशेष महत्व रखता है और इसे भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। नारियल भी पूजा की आवश्यक सामग्री है जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बरगद की कोपल का प्रयोग करना चाहिए, जो वट सावित्री पूजा की विशिष्ट पहचान है और इस व्रत का मुख्य आधार है।
पूजा के लिए आवश्यक वस्त्र और श्रृंगार सामग्री

कपड़े और धागे – सवा मीटर कपड़ा, लाल सूत का धागा, रक्षा सूत्र
वट सावित्री पूजा सामग्री की तैयारी करते समय सबसे महत्वपूर्ण चीज है कपड़े और धागे की व्यवस्था। इस विशेष पूजा के लिए सवा मीटर का एक कपड़ा चाहिए होता है, जो पारंपरिक रूप से पीले या लाल रंग का होना चाहिए। यह कपड़ा देवी सावित्री को अर्पित करने के साथ-साथ वट वृक्ष को लपेटने के लिए भी उपयोग किया जाता है।
सूत का लाल धागा इस पूजा का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। यह धागा वट वृक्ष के चारों ओर सात बार लपेटा जाता है और मांगलिक कामनाओं के साथ बांधा जाता है। लाल रंग का धागा शुभता और सुहाग की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
रक्षा सूत्र भी इस पूजा का आवश्यक हिस्सा है, जो पूजा के दौरान पति की लंबी आयु और कल्याण के लिए बांधा जाता है। यह सूत्र विशेष मंत्रों के साथ तैयार किया जाता है।
सोलह श्रृंगार की पूरी सामग्री
सोलह श्रृंगार की सामग्री वट सावित्री पूजा का पारंपरिक और अनिवार्य हिस्सा है। यह सामग्री देवी सावित्री को समर्पित करने के लिए तैयार की जाती है और सुहागिन स्त्रियों के लिए विशेष महत्व रखती है।
सोलह श्रृंगार में शामिल होता है – काजल, बिंदी, चूड़ी, नथ, कंगन, पायल, अंगूठी, कानों के झुमके, गले का हार, माथापट्टी, कमरबंद, बाजूबंद, इत्र, फूलों का गजरा, मेहंदी और अल्ता। इन सभी सामग्रियों को एक थाली में सजाकर रखा जाता है।
यह सामग्री न केवल पूजा के लिए आवश्यक है बल्कि यह स्त्री के सोलह विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व भी करती है। व्रत करने वाली महिलाएं इन सामग्रियों से स्वयं को भी सजाती हैं।
सिंदूर, रोली, हल्दी और हल्दी का पेस्ट
रोली, हल्दी, हल्दी का पेस्ट और सिंदूर – ये चार चीजें वट सावित्री पूजा की आत्मा हैं। रोली का उपयोग तिलक लगाने और देवी सावित्री के माथे पर लगाने के लिए किया जाता है। यह शुभता और मंगलकारी शक्ति का प्रतीक है।
हल्दी और हल्दी का पेस्ट दोनों ही पवित्रता और शुद्धता के लिए आवश्यक हैं। हल्दी का पेस्ट विशेष रूप से देवी को अर्पित करने के साथ-साथ वट वृक्ष पर भी लगाया जाता है। यह स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
सिंदूर इस पूजा की सबसे महत्वपूर्ण सामग्री है क्योंकि यह सुहाग का प्रमुख चिह्न है। यह देवी सावित्री के माथे पर लगाने के साथ-साथ व्रत करने वाली महिला अपनी मांग में भी भरती है। यह पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक है।
भोग और प्रसाद की तैयारी

गेहूं के आटे की पूरियां और गुलगुले बनाना
वत सावित्री पूजा सामग्री में सबसे महत्वपूर्ण भाग गेहूं के आटे से बने व्यंजन हैं। पूजा के लिए गेहूं के आटे की पूरियां बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ये पूरियां साधारण नमकीन पूरियों से अलग होती हैं और इन्हें विशेष रूप से व्रत के नियमों के अनुसार तैयार करना चाहिए।
गेहूं के आटे से बने गुलगुले भी इस पूजा का अभिन्न अंग हैं। ये मीठे गुलगुले माता सावित्री को अर्पित करने के लिए विशेष रूप से बनाए जाते हैं। गुलगुले बनाते समय आटे में थोड़ी मिठास मिलाकर इन्हें तैयार करना चाहिए।
तैयारी की विधि:
- गेहूं का आटा छानकर रखें
- पूरियों के लिए आटे में थोड़ा तेल मिलाकर सख्त आटा गूंधें
- गुलगुलों के लिए गुड़ या चीनी मिलाकर मीठा आटा तैयार करें
- दोनों व्यंजन पूजा से पहले ही तैयार कर लें
भीगा चना और चावल की व्यवस्था
वट सावित्री व्रत की पूजा में भीगे चने का विशेष महत्व है। चने को रात भर पानी में भिगोकर रखना चाहिए ताकि सुबह तक वे फूल जाएं। यह भीगा चना माता सावित्री को अर्पित करने के लिए पवित्र माना जाता है।
चावल भी इस पूजा की अनिवार्य सामग्री है। साधारण चावल का उपयोग करके इसे पूजा की थाली में शामिल करना चाहिए।
व्यवस्था के मुख्य बिंदु:
- रात्रि में चने को साफ पानी में भिगो दें
- सुबह चने को धोकर छानकर रख लें
- चावल को साफ करके अलग कटोरी में रखें
- दोनों सामग्रियों को पूजा की थाली में शामिल करें
मिठाई और अन्य प्रसाद सामग्री
वत सावित्री पूजा में मिठाई का भोग लगाना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। पारंपरिक रूप से घर में बनी मिठाई को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन बाजार की शुद्ध मिठाई का भी उपयोग किया जा सकता है।
प्रसाद की व्यवस्था में शामिल करें:
- लड्डू, बर्फी या अन्य पारंपरिक मिठाई
- तुलसी के पत्ते प्रसाद के साथ
- पान के पत्ते सुपारी सहित
- नारियल और फल
सभी प्रसाद सामग्री को साफ-सुथरे बर्तनों में व्यवस्थित रूप से रखना चाहिए। मिठाई को ढककर रखें ताकि वह शुद्ध रहे और पूजा के समय माता सावित्री को श्रद्धापूर्वक अर्पित की जा सके।
जल पूजा और पात्र व्यवस्था

गंगाजल और साधारण जल का लोटा
वट सावित्री पूजा में जल का विशेष महत्व है। पूजा के लिए आपको गंगाजल और साधारण जल दोनों की आवश्यकता होगी। गंगाजल को पवित्र माना जाता है और इसका उपयोग विशेष अर्पण के लिए किया जाता है। साथ ही एक लोटे में साधारण स्वच्छ जल भी तैयार रखना आवश्यक है।
गंगाजल को अलग पात्र में रखें और साधारण जल को अलग लोटे में भरकर रखें। यह वट सावित्री पूजा सामग्री का अहम हिस्सा है। दोनों प्रकार के जल का उपयोग पूजा की अलग-अलग विधियों में होता है।
दो सिंदूरी जल से भरे पात्र
पूजा विधि के अनुसार दो पात्रों में सिंदूरी जल तैयार करना आवश्यक है। ये दोनों पात्र स्वच्छ होने चाहिए और सिंदूर मिले हुए जल से भरे होने चाहिए। सिंदूरी जल का विशेष धार्मिक महत्व है और यह मंगल प्रतीक माना जाता है।
दोनों पात्रों को पूजा स्थल पर उचित स्थान पर रखें। ध्यान रखें कि सिंदूर का रंग हल्का गुलाबी दिखाई दे, बहुत गहरा न हो।
अक्षत, पान-सुपारी की व्यवस्था
पूजा सामग्री में अक्षत का विशेष स्थान है। अक्षत यानी बिना टूटे चावल के दाने, जो पवित्रता का प्रतीक हैं। साथ ही पान के पत्ते और सुपारी की भी व्यवस्था करनी होगी।
अक्षत को साफ थाली में रखें। पान के पत्तों को धोकर साफ करने के बाद अलग रखें। सुपारी को छोटे टुकड़ों में काटकर तैयार करें। ये तीनों चीजें पूजा के दौरान अर्पित की जाती हैं और इनका होना अत्यंत आवश्यक है।
वट सावित्री व्रत की सही पूजन विधि

सुबह स्नान के बाद बरगद के पेड़ की पूजा करना
महिलाओं को सुबह स्नान करने के बाद बरगद के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। यह पूजा वत सावित्री व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि इस पेड़ में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश एक साथ वास करते हैं। इसलिए बरगद के वृक्ष की पूजा करने से तीनों देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है।
पूजा शुरू करने से पहले वत सावित्री पूजा सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रख लें। पेड़ के नीचे स्वच्छ कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री को सजा दें। हाथ में कुमकुम, अक्षत, फूल और दीप लेकर भक्ति भाव से पेड़ की पूजा शुरू करें।
पेड़ की परिक्रमा करते हुए रक्षा सूत्र बांधना
अब महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए पेड़ के चारों तरफ रक्षा सूत्र बांधती हैं। यह क्रिया अत्यधिक पवित्र मानी जाती है और इसके द्वारा पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। परिक्रमा करते समय सावित्री माता का स्मरण करना चाहिए।
रक्षा सूत्र बांधते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करें:
- “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता”
- “सावित्री देवी माता, रक्षा करो परिवार”
परिक्रमा सात बार करनी चाहिए और हर परिक्रमा के दौरान पेड़ के तने पर रक्षा सूत्र लपेटना चाहिए।
गाय के गोबर का उपयोग और पूजा का संपूर्ण विधान
पूजा सामग्री में गाय का गोबर शामिल है जो पूजा के लिए अत्यंत आवश्यक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार वट अमावस्या का व्रत पूरे विधि-विधान से करना चाहिए।
गाय के गोबर का उपयोग निम्न प्रकार से करें:
- पेड़ के चारों ओर गोबर से छोटे-छोटे दीप बनाएं
- इन दीपों में तेल या घी डालकर प्रज्वलित करें
- गोबर से पेड़ के तने पर तिलक लगाएं
संपूर्ण पूजा विधान में आरती, मंत्र जाप, और प्रार्थना शामिल होती है। पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद वितरण करना चाहिए। इस तरह से पूरे विधि-विधान के साथ वत सावित्री व्रत की पूजा करने से पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

वट सावित्री व्रत की सफल पूजा के लिए सभी आवश्यक सामग्री का पहले से तैयार होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस लिस्ट में दी गई हर वस्तु का अपना विशेष महत्व है – चाहे वो सत्यवान-सावित्री की मूर्ति हो, रक्षा सूत्र हो या फिर गेहूं के आटे की पूरियां। जब आप इन सभी चीज़ों को व्यवस्थित रूप से तैयार कर लेंगी तो आपकी पूजा में किसी प्रकार की कमी नहीं रह जाएगी।
याद रखें कि वट सावित्री का व्रत सिर्फ एक पूजा नहीं बल्कि अपने पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए की जाने वाली साधना है। इसलिए पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत को संपन्न करें। बरगद के वृक्ष की परिक्रमा करते समय मन में सच्ची भावना रखें और माता सावित्री से अपने पति के कल्याण की प्रार्थना करें। पूजा की तैयारी पहले से कर लेने से आप आराम से और एकाग्रता के साथ यह पवित्र व्रत कर सकेंगी।
FAQs
1. वट सावित्री पूजा में कौन-कौन सी सामग्री लगती है?
वट सावित्री पूजा में रोली, सिंदूर, कलावा, फूल, फल, दीपक, धूप, मिठाई, भीगे चने, नारियल और बरगद की कोपल जैसी सामग्री लगती है।
2. वट सावित्री पूजा में बरगद के पेड़ का क्या महत्व है?
बरगद का पेड़ पति की लंबी आयु, स्थिरता और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस पेड़ की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है।
3. वट सावित्री व्रत में कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
वट वृक्ष की 7, 21 या 108 परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।
4. वट सावित्री पूजा में कौन सा धागा उपयोग होता है?
पूजा में लाल सूत का धागा या कलावा उपयोग किया जाता है जिसे बरगद के पेड़ पर बांधा जाता है।
5. वट सावित्री व्रत में क्या भोग लगाया जाता है?
गेहूं के आटे की पूरियां, गुलगुले, भीगे चने, मिठाई, फल और नारियल का भोग लगाया जाता है।
6. वट सावित्री पूजा के लिए कौन से कपड़े पहनने चाहिए?
लाल, पीले और हरे रंग के वस्त्र इस पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं।
7. क्या वट सावित्री पूजा घर में कर सकते हैं?
हाँ, यदि पास में बरगद का पेड़ नहीं है तो उसकी तस्वीर या छोटी टहनी रखकर घर में पूजा की जा सकती है।
8. वट सावित्री पूजा में सोलह श्रृंगार क्यों किया जाता है?
सोलह श्रृंगार सुहाग और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए विवाहित महिलाएं इसे पूजा में शामिल करती हैं।
9. वट सावित्री पूजा में गंगाजल का क्या उपयोग है?
गंगाजल पूजा स्थल और सामग्री को पवित्र करने के लिए उपयोग किया जाता है।
10. वट सावित्री व्रत का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखा जाता है।
- वत सावित्री पूजा सामग्री: 7 मिनट में तैयार करें पूरी लिस्ट – 99% महिलाएं भूल जाती हैं ये चीज़ें!
- Vat Savitri Vrat 2026 की तारीख आई सामने! इस रंग के कपड़े पहनकर करें पूजा – 99% महिलाएं नहीं जानतीं यह राज!
- वट सावित्री पूजा में क्या क्या सामान लगता है-लिस्ट व आसान विधि
- गणेश पूजा में क्या-क्या सामग्री चाहिए-2026 के लिए संपूर्ण और आसान मार्गदर्शिका
